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गांव में बैडमिंटन और ओलंपिक का सपना

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गांव में हूं ,ये जनवरी का महीना है,ठंड काफी है,बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से 20km दूर रामकृष्ण दूबियाही गांव है,  मुझे शहर के व्यस्त जिंदगी में काम काम के चक्कर में हमेशा मोटरसाइकिल से ही घूमना होता है, जब भी गांव आता हूं, आस पास सब जगह पैदल ही घूमता हूं, ताकि गति बनी रहे,  वैसे ही एक शाम घर से कुछ दूर निकल कर घूम रहा था, आस पास के बच्चो में कोतुहल और हलचल थी,  मेरे मन में भी जिज्ञासा थी,मैं भी शामिल हो गया, मुझे युवा मन बहुत पसंद है, गांव में बच्चे मुझे अंकल जी से संबोधन करते है..... शहर की जिंदगी में लोग अपने में ही रहते है, कोई दूर दराज से कमाने आते है,और रिश्ते नाते सब गांव में ही रह जाते है, शहर की जिंदगी में कुछ कमरे में रहिए ,और बगल के परोसी अच्छे मील गए तो,भगवान मील गया,नही तो ..... कोई आपको रिश्ते नमो से नही बुलाने वाला, कोई फर्क नही की आपकी उम्र कितनी है,सब आपको एक ही तराजू में रखेंगे। "हम बात कर रहे गांव में कई रिश्ते आ जाते है, और आप तुरंत ही किसी के चाचा, दादा, नाना,मामा,देवर,जेठ, ससुर और न जाने क्या क्या बन जाते है। "   .......…....      बच...

लॉ स्टूडेंट्स का बिहार बार काउंसिल में पंजीकरण

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कई लॉ स्टूडेंट्स को बार काउंसिल में अपना पंजीकरण के आवेदन के लिए जिज्ञासा बना रहता है, आपको बता दें, पटना पहुंचे ही इनकॉमटेक्स गोलंबर के पास उतर कर पटना हाई कोर्ट गेट 5 पर चले जाए,किसी से पूछेंगे बता देगा। Fee बार काउंसिल उम्र और जातिगत आरक्षण अनुरूप फ्री लेती है। अगर आप 35 साल के आस पास है, जेनरल और पिछड़ा वर्ग2 में आते है तो आपको सभी चालान एक साथ 24700 लगेंगे, इसी तरह अन्य वर्गो को चालान में छूट दी गई है। कार्यालय के काउंटर में जा कर बताने पर उसी अनुरूप आपको चालान रशिद दिया जाएगा,  चालान रशिद को भवन के ही नीचे पंजाब नेशनल बैंक में जमा कर दें,  प्राप्त रशिद को पुनः काउंटर पर उन्ही मैडम को दें जिन्होंने आपको चालान रशिद दी थी, रशिद एक एक प्रति आपको देते हुए आपको आवेदन फॉर्म सीडी सहित 2 रशिद काट कर देगी,  किसी एक वकील के माध्यम से फॉर्म भर लीजिए,  खर्च वकील के उपर है वो आपसे कितना लेंगे। आवेदन फॉर्म के साथ  1- मैट्रिक का मार्कशीट + मूल प्रमाण पत्र। 2- ग्रेजुएशन का मार्कशीट + प्रोविजनल सर्टिफिकेट या मूल प्रमाण पत्र । 3- लॉ का अंतिम साल का मार्कशीट +प्रो...

लजीज व्यंजन"भक्का "

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पूर्णिया- जिला से सटे अनुपनगर बेलोरी स्थित एक बस्ती में लजीज चावल के आटे में गुड़ या मिठ्ठा डाल कर मिट्टी की हांडी में पानी रख कर उसको उपर माटी के ही डकन में छोटी सी सुराही /छेद कर निकलते हुए भाप के उपर कपड़े से ढक कर रख कर, कुछ ही मिनट में लजीज गर्मा गर्म भक्का आपके लिए तैयार है।  उपर से हरी मिर्च प्याज की चटनी और मजेदार बना देती है। ललिता देवी एवम अन्य ग्रामीण महिलाएं ठंड के मौसम में लोगों के नास्ते के लिए बनाती है।कीमत भी कम, ग्रामीणों का हौसला बढ़ाने आप आ सकते है। थोड़ा ये विलुप्त होती रेस्पी के लिए शहर से थोड़ा दूर जाना परेगा। वही चलता है।शाम की पाठशाला का एक केंद्र। आप bhakka ऑडर की सुविधा नहीं है। आप +916207894314 ललिता दीदी से बात कर इनके बने हुए bhake खा सकते हैं। शाम के समय, जय हिंद।

शाम की पाठशाला का जेल सुधार अभियान कार्यक्रम

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केंद्रीय कारा पूर्णिया में शाम की पाठशाला के माध्यम से चल रही प्रस्तुति परक नाट्य संगीत कार्यशाला में दिनांक 07/01/2020 को प्रथम सत्र में लिम्का बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले पूर्णिया के प्रशिद्ध चित्रकार  श्री राजीव राज बंदी रंगप्रशिक्षुकों को  रंग और प्रकाश की जानकारी दिये, राजीव राज ने कहा कि रंग और प्रकाश मानवजीवन में काफी महत्वपूर्ण हैं,रंग के बिना ये जीवन रंगहीन और निरश होता हैं, रंगों के माध्यम से जीवन को उत्साहवर्धन बनाया जा सकता हैं,रंगों के माध्यम से बहुत सारे रोगों को दूर किये जा सकते हैं, कलर थैरेपी एक ऐसी विधा हैं,जिसमे किसी भी तरह के बीमारियों को रंग के माध्यम से दूर किया जा सकता हैं,रंग से ही हमे नये और पुराने चीज का बोध होता हैं, जैसे कपडे पुराने नही होते रंग पुराना हो जाता हैं,                     साथ ही रंगमंच में कई रंगों में कई रंगों के विशेष महत्व होता हैं,इसके साथ ही प्रकाश के माध्यम से भी समय का बदलाव एवं इफेक्ट को रंग एवं प्रकाश  से मंच पर दिखाया जाता हैं,   मुख्य रूप से तीन रंग होत...

पूर्णिया की विभा दीदी

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बिहार / पुर्णिया की विभा दीदी उन सभी महिलाओ के लिये प्रेरणास्रोत्र हैं जो ये समझती हैं कि शादी और परिवार बढ़ने के बाद पढ़ाई बंद हो जाती हैं, और वो स्वरोजगार नहीं कर सकती हैं, पढाई के प्रति इनकी मेहनत और लगन देख कर हम सब काफी प्रभावित हैं,  दो छोटे छोटे बच्चे के साथ ही साथ परिवार को संभालती हैं,तो दूसरे तरफ अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं, पढ़ाई करने के लिए एक लंबी दूरी भी तय करती हैं इन्होंने बताया कि रोजाना 7 से 8 किलोमीटर दुरी तय कर अपने बस्ती शिवनगर वार्ड 10 लालगंज रोड से पढाई करने रोजाना आती हूँ, सुबह 6 बजे से पढ़ाई करने जाने वक्त मेरे दोनों छोटे बच्चे मेरे बिना नहीं रह पाते हैं, पढाई के वक़्त मेरे पति उनका पूरा ख्याल रखते हैं, सभी के लिए और पहले उठ कर नाश्ता बना देती हूँ,एक बेटी हैं, थोड़ी बड़ी हो गई हैं, स्कूल जाने लगी हैं ,मेरी परेशानी देख समझ जाती हैं ,और अपने छोटे भाई का ख्याल रखती हैं, पढाई से आने के बाद घर का काम काज खत्म कर,कई महिलाओ को स्वरोजगार से जोड़ रही हूँ जिसमे उन्हें जूट ,सिलाई,कढ़ाई का प्रशिक्षण देती हूँ, और प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओ से जुट से निर्मित सामग्री को स्थानीय बाजा...