शाम की पाठशाला का जेल सुधार अभियान कार्यक्रम

केंद्रीय कारा पूर्णिया में शाम की पाठशाला के माध्यम से चल रही प्रस्तुति परक नाट्य संगीत कार्यशाला में दिनांक 07/01/2020 को प्रथम सत्र में लिम्का बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले पूर्णिया के प्रशिद्ध चित्रकार  श्री राजीव राज बंदी रंगप्रशिक्षुकों को  रंग और प्रकाश की जानकारी दिये,
राजीव राज ने कहा कि रंग और प्रकाश मानवजीवन में काफी महत्वपूर्ण हैं,रंग के बिना ये जीवन रंगहीन और निरश होता हैं, रंगों के माध्यम से जीवन को उत्साहवर्धन बनाया जा सकता हैं,रंगों के माध्यम से बहुत सारे रोगों को दूर किये जा सकते हैं, कलर थैरेपी एक ऐसी विधा हैं,जिसमे किसी भी तरह के बीमारियों को रंग के माध्यम से दूर किया जा सकता हैं,रंग से ही हमे नये और पुराने चीज का बोध होता हैं, जैसे कपडे पुराने नही होते रंग पुराना हो जाता हैं,
       
            साथ ही रंगमंच में कई रंगों में कई रंगों के विशेष महत्व होता हैं,इसके साथ ही प्रकाश के माध्यम से भी समय का बदलाव एवं इफेक्ट को रंग एवं प्रकाश  से मंच पर दिखाया जाता हैं,

  मुख्य रूप से तीन रंग होते लाल,पीला, नीला,इन्ही तीन रंगों के माध्यम से बाकी के सात रंग बनाये जाते हैं,इस प्रकार सातों रंग प्रस्तुत होते हैं,
जिसे बै नि हा पी ना ला कहते हैं,
अर्थात रंग और प्रकाश के बिना नाट्य मंचन करना कठिन हैं।

रंग बनाने की विधि और रंगों के प्रतीक के बारे में बताया गया।
लाल +पीला -नारंगी रंग
पीला +नीला -हरा रंग
लाल  +नीला -बैगनी रंग

 लाल रंग- उत्साह,उमंग,शुरुआत,जोश,क्रोध का प्रतीक हैं,
नीला-शांति,दृढ़ संकल्प,ऊँचाई,आत्मबल का प्रतीक हैं।
पीला-धन,ऊर्जा,शक्ति का प्रतीक हैं,
हरा- हरीयाली, उमंग,शांति,ईमानदारी का प्रतीक हैं।
नारंगी-उदारता,शक्ति,बैराग का प्रतीक हैं,
सफेद-शांति, निष्पक्ष, निश्चल,जाम का प्रतीक हैं,
काला- अंधकार,कमजोरी,डर,शक,भ्रम का प्रतीक हैं।
साथ ही कहा कि चेहरे के हाव भाव को भी अलग अलग रंगों के माध्यम से भी नाटक में दिखाया जाता हैं,
अंत मे केंद्रीय कारा अधीक्षक पूर्णिया और कार्यशाला के तमाम सदस्यो को बधाई देते हुए कहे कि   बंदीयो के चरित्र निर्माण की दिशा में यह एक अच्छी पहल हैं,लगातार कला के जानकार बंदी रंगप्रशिक्षुकों को जानकरी देने आ रहे हैं,आज मैं भी आया हूँ।

दूसरे सत्र में शोधार्थी अक्षय शर्मा
आगामी कार्यक्रम में होने वाले माईम एक्ट की बारीकियों को ध्यान में रख कर रिहर्सल करवाया  और शाम की पाठशाला के संस्थापक ई0 शशि रंजन उपस्थित थे,उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर होना हैं। जिसमे वरिष्ठ रंगकर्मी मिथिलेश रॉय,युवा रंगकर्मी शोधार्थी अक्षय शर्मा के द्वारा नाटक की प्रस्तुति भी तैयार की जा रही हूं।

Comments

Popular posts from this blog

गांव में बैडमिंटन और ओलंपिक का सपना

श्रीमती आशा देवी गांव की रात्रि पाठशाला की प्रथम शिक्षिका ने प्रशांत किशोर जी का तिलक लगा कर स्वागत किया।