कचहरी कोर्ट में अनपढ़ का कलंक
एक दिन एडीजे पंचम महोदय के कोर्ट रूम से बाहर निकल रहा था, तभी एक बुजुर्ग उम्र करीब 55 या 60 का होगा, बारिश के कारण बदन पर प्लास्टिक लपेटे हाथो में कागज लिए , पुलिस वालो से कुछ लिखने का फरियाद कर रहे थे, पुलिस अपनी ड्यूटी के कारण समय नहीं दें पा रहे थे, उसी समय एक सीनियर के अधिवक्ता को देख पुलिस वालो ने झटपट सीनियर के पास कागज बढ़ा दिए लिखने को ,लेकिन सीनियर अधिवक्ता केस के सिलसिले में काफी व्यस्त होने के कारण, वहां से चल दिए, फिर वो पुलिस वाला बुजुर्ग व्यक्ति को कागज दें दिए, मैं ये सब देख ही रहा था, तभी उस बुजुर्ग ने मेरे तरफ देखा, मैने उन्हे एक शांत जगह ले गया,और समस्या पूछा उसने कहा साहब "हम अनपढ़ है, मेरा केस न O साहब ने लिख कर दिया है", आप उसे मेरे इस कागज पर लिख दें, मेरे वकील साहब बारिश के कारण अभी नहीं आ पाए है, हम पढ़े लिखे रहते तो अपने से लिख लेते, कोई हम सबों को पढ़ाया ही नहीं।
मैंने भी मुस्कुराते हुए उनका काम कर दिया,
और सोचने लगा।
मैं जो शाम की पाठशाला के माध्यम से प्रौढ़ शिक्षा ग्रामीणों के लिए चला रहा हूं, सही मायने में जरूरी है, कई लोगो को अक्षर का ज्ञान तक नही और वो कोर्ट कचहरी का चक्कर लगा रहे है।
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