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Showing posts from October, 2023

निरक्षरता का कलंक जेल तक

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वकालत में आने से पहले कई स्तर पर शाम की पाठशाला के माध्यम से प्रौढ़ शिक्षा पर काम कर चुका था, मैं,  गांव गांव जब शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम चला रहा था, जिसमे जमुई,मोतिहारी,सीतामढ़ी ,मुजफ्फरपुर,पूर्णिया,कटिहार,किशनगंज,अररिया, भागलपुर एवम अन्य कई जिलों में शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम शाम की पाठशाला माध्यम से कर चुका था मैं। फोटो - आदिवासी इलाके में शिक्षा जागरूकता  पूर्णिया  पूर्व मुख्यमंत्री स्व भोला पासवान शास्त्री जी के परिजनों के बीच शाम की पाठशाला। फोटो सीतामढ़ी आदरणीय ऋतु जायसवाल जी उद्घाटन करती हुई। तभी अनपढ़ होना गांव वाले अभिश्राप मानते थे, और मारपीट और अन्य कारण शिक्षा का अभाव मानते,  फिर जब जेल /सुधारगृह में पहली बार जेल सुधार अभियान कार्यक्रम चलाया ,जिसमे राष्ट्रपति पुरस्कृत श्री मिथिलेश राय जी का, अक्षय शर्मा जी का जेल अधीक्षक ई जितेंद्र सर का  भरपूर सहयोग मिला,  उस समय में भी देखा जो जेल के अंदर बंद है उसमे से आधे से ज्यादा ग्रामीण परिवेश से थे और सीधे तौर पर उन्हे अनपढ़ कहा जा...

कचहरी कोर्ट में अनपढ़ का कलंक

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एक दिन एडीजे पंचम महोदय के कोर्ट रूम से बाहर निकल रहा था, तभी एक बुजुर्ग उम्र करीब 55 या 60 का होगा, बारिश के कारण बदन पर प्लास्टिक लपेटे हाथो में कागज लिए , पुलिस वालो से कुछ लिखने का फरियाद कर रहे थे, पुलिस अपनी ड्यूटी के कारण समय नहीं दें पा रहे थे, उसी समय एक सीनियर के अधिवक्ता को देख  पुलिस वालो ने झटपट  सीनियर के पास कागज बढ़ा दिए लिखने को ,लेकिन सीनियर अधिवक्ता केस के सिलसिले में काफी व्यस्त होने के कारण, वहां से चल दिए, फिर वो पुलिस वाला बुजुर्ग व्यक्ति को कागज दें दिए, मैं ये सब देख ही रहा था, तभी उस बुजुर्ग ने मेरे तरफ देखा, मैने उन्हे एक शांत जगह ले गया,और समस्या पूछा उसने कहा साहब "हम अनपढ़ है, मेरा केस न O साहब ने लिख कर दिया है", आप उसे मेरे इस कागज पर लिख दें, मेरे वकील साहब बारिश के कारण अभी नहीं आ पाए है, हम पढ़े लिखे रहते तो अपने से लिख लेते, कोई हम सबों को पढ़ाया ही नहीं। मैंने भी मुस्कुराते हुए उनका काम कर दिया,  और सोचने लगा।  मैं जो शाम की पाठशाला के माध्यम से प्रौढ़ शिक्षा ग्रामीणों के लिए चला रहा हूं, सही मायने में जरूरी है, कई लोगो को अक्षर ...