पश्चिम चंपारण थारू जनजाति क्षेत्र में भ्रमण
बिहार के पश्चिम चंपारण का भ्रमण :- थारू जनजातीय समुदाय से मिलना भी एक सुखद अनुभूति रही, मेरे कई कामों में सामाजिक कार्य भी एक है। पटना से टीम के साथ पश्चिम चंपारण के बगहा अंतर्गत कई जगहों पर भ्रमण के दर्मियां जनजातियों समुदाय से भी मिलना रहा,जिन्हे मैं बिहार के अलग अलग जिलों में भी देखा हूं, और उनकी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर भी ले गया हूं, पर एक खास जनजाति समुदाय के बारे में सिर्फ पढ़ा था,सुना था ,थारू समुदाय के बारे में,उनसे कभी मिला नही था। नाम पूछने पर नेपाली महतो बताए, मैं चौक गया, महतो टाईटल सब नाम के साथ जोड़ते है, अक्सर बिहार में कई जातियां महतो नाम के साथ लगाते है। खरवार जनजातीय समुदाय भी कई जगहों पर महतो लगाते है। पर ये खरवार समुदाय से नही थे, ये थारू समुदाय से है, इनकी वेश भूषा भी अन्य जनजातीय समुदाय से अलग शहरीकरण में ढल हुई थी, इनका विस्तार नेपाल और भारत के बीच जंगलों के तराई क्षेत्र में है। वो बताते है की शादी का विस्तार अन्य जिलों में हम सब नही किए है। नेपाल में शादी होती है। रंग रूप भी नेपाल के लोगो जैसा ही मिलता जुलता था, ...